
आजकल बड़ी संख्या में युवा पढ़ लिख कर गाँवों से शहरो की ओर पलायन कर रहे है , यदि ऐसा ही होता रहा तो एक दिन गाँव में सिर्फ अनपढ़ माँ- बाप ही बचेंगे ....... यही सोचते सोचते मैंने भी डेढ़ साल नोएडा में गुजार लिए लेकिन अब स्थिति भयावह होती जा रही है . प्रदूषण, सडक दुर्घटना , कुहरा, पैसे की मारामारी , बलात्कार , चोरी , डकैती देखकर ऐसा लगता है मानो गाँव ही ठीक है यार ..... अगर हम लोग कुछ सुधार अपने गाँव में कर ले और जीवकोपार्जन के लिए कुछ मिल जाए तो वही बेहतर है . बुजुर्गो की केवल एक अलाप रहती है की गाँव की खेती में कुछ नहीं रखा है शायद उन्हें नहीं पता की आने वाला समय गाँव का ही है और लोग भागकर वापस उसी खेत की और आएँगे ..... लेकिन बैल लेकर नहीं नइ तकनीक लेकर .... आजकल तमाम नए तरीको से वैज्ञानिको ने नइ नइ खोजे कर ली है , जैसे की चावल में ही मछली का स्वाद , रोटी में साग की महक, फूलो की खेती ......परन्तु युवा अनजान है इन चीजो से उन्हें लगता है की परिवार सिर्फ कार्पोरेट ऑफिस की AC में ही बैठकर चल सकता है ............... आगे हम आपको बताएँगे की अब देश को कैसे बदलना है , कैसे गाँव अब शहर होंगे ...........बस जुड़े रहिये , और अपने विचारो से अवगत कराते रहिये .